गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

बोलें सोच विचार कर, कह कर गये कबीर

बोलें सोच विचार के, कह कर गये कबीर
रखो जीभ के पाँव में, डाल सदा जंजीर

घाव न भरते उम्र भर, देते कष्ट अपार
जब जब मन को वींधते, कटु शब्दों के तीर

जीवन क्षणभंगुर यहाँ, नित्य रहा है कौन
क्यों समझे जग को अरे, तू अपनी जाग़ीर

घड़ा पाप का एक दिन, निश्चित जाता फूट
सदियों से समझा रहे, सूफ़ी संत फ़क़ीर

मेहनतक़श भूखा मरे, गाँव गली हर रोज़
नीति-नियंता देश के, उड़ा रहे हैं खीर

फ़रियादी ने एक दिन, मुझसे किया सवाल
बँधा न्याय की आँख पर, क्यों है काला चीर

ढूँढ रहा हूँ आज तक, उत्तर हो हैरान
हल्के में लेना नहीं, बात बहुत गंभीर

गुलशन में लागू हुआ, जंगल का कानून
काँटे तय करने लगे, फूलों की तक़दीर

राकेश दुबे “गुलशन”
10/07/2016
बरेली

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