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बोए पेड़ बबूल के

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

हाइकु

August 29, 2017

विधा—- कविता
-जापानी शैली की कविता – हाइकु
=बोए पेड़ बबूल के =

न होता कभी
प्रेम जिसका कम
वह होती माँ

न पिता जैसा
अमीर दुनिया में
बच्चों के लिए

फिर क्यों है ये
आज की युवा पीढ़ी
बड़ी निष्ठुर

कर रही है
घर से बेघर वो
प्रिय जनों को।

इतिहास भी
दोहराया जाएगा
है बात पक्की।

तेरी संतान
पूर्वजों का बदला
लेगी तुझसे।

तुझको भी वो
तार तार करेगी
तेरी तरह।

तू तडपेगा
उनकी ही तरह
बेघर होगा।

जरा सोचते
जो आज बो रहे हो
कल काटोगे।

तुम आज ये
पीड़ा न पाते होते
अपनों से ही।

दिया है दर्द
अपनों को तुमने
वही पाओगे।

इसे कहेंगे
भैया बुरे काम का
बुरा नतीजा।

जैसा करोगे
वैसा फल पाओगे
पछताओगे।

संभल जाओ
दो सहारा उनको
सुख पाओगे।

———रंजना माथुर
दिनांक 07/07/2017 को मेरी स्व रचित व मौलिक रचना।
@copyright

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Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more

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