गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

बे वक्त ना आया जाया करो

बे वक्त ना आया जाया करो
मेरे खलल को टाल जाया करो

सहर पर भी निकल जाया करो
कदम से कदम भी मिलाया करो

शाम को लोटूं तो मिल जाया करो
दरवाजे पर झलक दे जाया करो

सर्द रातें है छत पर ना आया करो
झरोखे से शॉल में दिख जाया करे

ख्‍वाबों में आ खलल ना डाला करो
यूं बे वक्त आया जाया ना करो

लक्ष्‍मण सिंह
जयपुर

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