Aug 19, 2016 · मुक्तक
Reading time: 1 minute

बेहोश सा जीता हूँ,,,

ये बेचैनी का सबब है क्या
मन में उठा बवंडर है क्या

कुछ छूटता सा लगता है
कुछ अंदर टूटा है क्या

बहुत समेटता हूँ जज्बातों को
आज फिर बिखरा है क्या

अनजानी सी खोज में भटकता हूँ
आज फिर कुछ दिखा है क्या

बेहोश सा जीता हूँ
तुम्हें भी लगा है ये रोग क्या
,,,,लक्ष्य
@myprerna

9 Views
Copy link to share
Lakshya thakur
9 Posts · 122 Views
मेरी रचनाएँ दिल से निकलती हैं जिनमें काव्यशिल्प से ज्यादा भावों का जोर होता है।यहाँ... View full profile
You may also like: