कविता · Reading time: 1 minute

बेशर्मी से … (क्षणिका )

बेशर्मी से … (क्षणिका )

अन्धकार
चीख उठा
स्पर्शों के चरम
गंधहीन हो गए
जब
पवन की थपकी से
इक दिया
बुझते बुझते
बेशर्मी से
जल उठा

सुशील सरना

34 Views
Like
69 Posts · 3.3k Views
You may also like:
Loading...