बेवफ़ा

जो नाम लिख रहे थे आजकल
उसी को मिटा रहे थे हम
कुछ इस तरह अपने दिल को
पल पल समझा रहे थे हम
उन्हें ना थी कोई ख़बर
हमारे प्यार की यारो
महज़ एक इत्तेफाक़ था
उसी को चाह रहे थे हम
ज़िक्र कहीं नहीं था
कहानी में हमारा
मगर वो बेवफ़ा नहीं
सभी गुनाह सरेआम जला रहे थे हम
समझ बैठे जिन्हे जिंदगी की किरण
हाथ जले तो पता चला
इसी दिए को हवा से बचा रहे थे हम
उन्हें ख़बर ना थी हमारे प्यार की यारो
महज़ एक इत्तेफाक़ था
उसी को चाह रहे थे हम
… भंडारी लोकेश✍️

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