मुक्तक · Reading time: 1 minute

बेवजह ही हम उन्हें मनाने जा रहे थे ।

न जाने क्यों बेवजह ही उन्हें मनाने जा रहे थे ।
वो तो किसी और से ही दिल लगाने जा रहे थे ।
मोम जा दिल हो गया, जबसे मोहब्बत की उनसे ।
आज उस दिल में एक दिया वो जलाने जा रहे थे ।

*** प्रियांशु कुशवाहा ” अनजान “

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