कविता · Reading time: 1 minute

बेरंग होली

माँ तेरे बिन तेरी बगिया वीरान हो गयी
अब बेटी तेरे घर में हीं मेहमान हो गयी

खुश्बू तेरे प्यार की जो फैली थी फ़िज़ां में
आज जो फिजां में थी तेरी ख़ुश्बू भी खो गयी

पीहर जाने की बात की जब मैंने किसी से
कह दिया तू वहाँ से अब बेदखल हो गयी

ये सुन आ गयी मैं सन्नाटे में एकदम तब
नहीं माँ बिन मायका कहावत सच हो गयी

बाबू जी भी कुछ मज़बूर इस क़दर हो गये
उनकी नज़रों से दूर उनकी लाडली हो गयी

होली के तो रंग बेरंग हो गये हैं अब हमारे
हँसती खेलती दुनिया बेसुरी तस्वीर हो गयी

होली रंगीन हो लाडो तुम्हारी रब से दुआ की
पिहर संग फिर लाडो की जीदंगी रंगीन हो गयी

तेरी बनाई हुई चावल अब खीर हो गयी
वो तेरे प्यार के जादू की झप्पी अब खो गयी

पूछता रहता है ये दिल बार-बार तुमसे माँ
क्या ख़ता थी हमारी जो हमसे तू दूर हो गयी

जो दिये थे तूने हुनर मुझको ज़िंदगी के
आज वही मेरी पहचान ज़हां में हो गयी

मां आपके दिये प्यार और संस्कार अनमोल है
मैं भी कुछ दूँ मेरी जीदंगी की चाह हो गयी

बाबू जी के नाम और किसानी काम के संग
मेरी नाम जुड़ गयी अब यही मेरी शान हो गयी
#किसानपुत्री_शोभा_यादव

1 Like · 1 Comment · 52 Views
Like
147 Posts · 6.5k Views
You may also like:
Loading...