बेबस इंसान

देखो कितना बेबस इंसान ।
चूर चूर उसका अभिमान ।।

प्रकृति से जो कि छेड़छाड़ ।
अब रोता है भरकर दहाड़ ।।

सबको जीने का अधिकार ।
स्वतंत्र रहकर करने को विहार ।।

अभी समय की यही पुकार ।
फिर से कर लो सोच विचार ।।

अब करो न कभी खिलवाड़ ।
नही तो आएंगे फिर दुःख के पहाड़ ।।

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जगदीश लववंशी
जगदीश लववंशी
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J P LOVEWANSHI, MA(HISTORY) ,MA (HINDI) & MSC (MATHS) , MA (POLITICAL SCIENCE) "कविता लिखना...
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