मुक्तक · Reading time: 1 minute

बेबसी

मुँह जुंबा हो बन्द वे ताले मिले,
बाद मेहनत हाथ को छाले मिले.
भूख से तरपें नहीं बच्चे मेरे,
आबरू बेची, तब निवाले मिले |

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