मुक्तक · Reading time: 1 minute

#बेतकल्लुफ़_हुस्न 002

#बेतकल्लुफ़_हुस्न 002

वो मेरा इंतजार करते रहें, हम भी इंतेज़ार करते रहें।
वो जां निशार करते रहे, हम भी जां निसार करते रहें।
पर हाय ऐ किस्मत कमीनी, न था ये वक्त को मंजूर।
वो सनम हम पे मरते रहें, हम बेदर्दी वतन पे मरते रहें।।

©® पांडेय चिदानंद “चिद्रूप”
(सर्वाधिकार सुरक्षित २४/१०/२०१८ )
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