बेटी

बेटी
फेहरिस्त-ए-किरदार औरत से,
बेटी भी एक किरदार है|
यूँ तो हर रूप उम्दा है
पर बेटी तो बहार है|
आंगन में उससे खुशियाँ
वह रहमत-ए-परवरदीगार है|
शैतानियत कर दे रूखसत,
बेटी वह चमत्कार है
इंसान वही दुनिया में,
बेटी से जिसको प्यार है|

हेमा तिवारी भट्ट

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