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बेटी

पं.संजीव शुक्ल

पं.संजीव शुक्ल "सचिन"

कविता

February 12, 2018

💐💐💐बेटी💐💐💐
———
बेटी; बेटी दीये की बाती है,
बेटी प्रेम प्रित की पांती है।
बेटी; बेटी घर का आंगन है,
बेटी माता का आंचल है।
बेटी; बेटी कुल की थाती है,
बेटी मात पिता की लाठी है।
बेटी; बेटी हार है फूलों का,
बेटी अभिमान दो कुलों का।
बेटी; बेटी पिता की जिज्ञासा,
बेटी रिश्तों की परिभाषा।
बेटी; बेटी दुर्गा काली हैं,
बेटी अन्नपूर्णा की थाली है।
बेटी; बेटी से सृजित जमाना है,
बेटी राधा, मीरा, सत्यभामा है।
बेटी; बेटी पूण्य है जीवन का,
बेटी प्रसाद है ईश्वर का।
……
©®पं.संजीव शुक्ल “सचिन”

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Author
पं.संजीव शुक्ल
From: नरकटियागंज (प.चम्पारण)
D/O/B- 07/01/1976 मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक प्राईवेट सेक्टर में कार्यरत हूँ। लेखन कला मेरा जूनून है।
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