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===बेटी===

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

October 12, 2017

उसके मिट जाने के भय से
जब मां के भीग गये कपोल।
कोख में सिमटी नन्ही के भी
मोती टपके गोल गोल।

भीतर कुछ हलचल होती है
जब बेटी की मां रोती है।
माँ तेरे आंसू क्यों बहते हैं।
ये सब तुझसे क्या कहते हैं।

माँ तुझे कष्ट हो तो मैं न आऊंगी
तुझे दुखी कर अच्छी बेटी कैसे बन पाऊंगी।
यह सुनकर ममता चौंक उठी
बुरी आशंका से कांप उठी।

नहीं नहीं ओ नन्ही जान
आने से पहले न हो हैरान।
मैं दुनिया से लड़ जाऊँगी
पर तुझे जहाँ में लाऊंगी।
जब मैं इस जग में आई थी
माँ ने भी तो सही रुसवाई थी।

अब मेरा है संकल्प अडिग
तू इस दुनिया में आएगी।
खेले कूदेगी और बढ़ेगी
विश्व में परचम फैलाएगी।

जब बेटे को हम नहीं कहते बेटी
फिर बेटी की तुलना क्यों बेटे से की जाएगी।
बेटी है तू इस रूप में ही संसार में जगमगाएगी।
माँ साथ है तेरे पग पग पर
तू निराश न होना पल भर

लाऊंगी तुझको दुनिया में
तुझे दिखाऊंगी संसार।
तेरा इस जग में आना
मेरे लिए होगा एक त्योहार।

इस कुप्रथा को बन्द कर के रहेंगे
भ्रूण हत्या प्रथा को नष्ट करके रहेंगे ।
हम छेड़ेंगे इसका महाअभियान
हम कर के रहेंगे यह कार्य महान।

नारी ही आगे आएगी
खुद की जड़ों को बचाएगी।
खुद ही खुद को खुद की बर्बादी से
तभी बचा वह पाएगी।

—-रंजना माथुर दिनांक 28/04/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

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Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more

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