.
Skip to content

बेटी

अनिल कुमार मिश्र

अनिल कुमार मिश्र

कविता

January 28, 2017

बेटी है आधार जगत का
बेटी से है सार जगत का
बेटी देवी,बेटी सीता
बेटी बाइबल,कुरान और गीता।

बेटी में संसार छिपा है
जग का सारा सार छिपा है
बेटी के छुन-छुन पाँवों में
जीवन का सब अनुराग छिपा है।

बेटी सूरज बेटी चंदा
बिन बेटी जीवन है अंधा
बेटी प्रेम का दरिया छल-छल
मन उसका है प्रतिपल निर्मल।

देश है बेटी,राष्ट्र है बेटी
जन,गण,मन का मान है बेटी
संविधान भारत की बेटी
नवयुग का निर्माण है बेटी।
~~~अनिल कुमार मिश्र
‘आञ्जनेय’
गाँधी नगर पूरब
हज़ारीबाग़,झारखण्ड

Author
अनिल कुमार मिश्र
अनिल कुमार मिश्र विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित काव्य संकलन'अब दिल्ली में डर लगता है'(अमेज़न,फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध) अशोक अंचल स्मृति सम्मान 2010 लगभग 20 वर्षों से शिक्षण एवं प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन सम्प्रति प्राचार्य,सी बी एस ई स्कूल निरंतर मुक्त... Read more
Recommended Posts
?बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ?
?? जलहरण घनाक्षरी ?? ?????????? *बेटियां बचाओ* और *बेटियां पढ़ाओ* सब बेटियों पे टिका जग बेटी है परम् धन। कोख में जो बेटी हो तो... Read more
कविता- बेटी
बेटी है स्वर्ग धरा का , मानव का है नन्दनवन । ेटी अंधविश्वास का अन्त है , बेटी है नव परिवर्तन । बेटी आधुनिकता का... Read more
जीवन का आधार है बेटी  “मनोज कुमार”
जीवन का आधार है बेटी । सुख शक्ति संसार है बेटी ।। बदल देती जो दुनिया को । ऐसा एक बदलाव है बेटी ।। अत्याचार... Read more
आज भी बेटी कल भी बेटी
*हलचल बेटी* एक सवाल एक हल भी बेटी,, आज भी बेटी कल भी बेटी,, खामोशी इन लवो की बेटी,, और दिल की हलचल बेटी,, आसानी... Read more