Jan 28, 2017 · कविता
Reading time: 1 minute

बेटी

बेटी है आधार जगत का
बेटी से है सार जगत का
बेटी देवी,बेटी सीता
बेटी बाइबल,कुरान और गीता।

बेटी में संसार छिपा है
जग का सारा सार छिपा है
बेटी के छुन-छुन पाँवों में
जीवन का सब अनुराग छिपा है।

बेटी सूरज बेटी चंदा
बिन बेटी जीवन है अंधा
बेटी प्रेम का दरिया छल-छल
मन उसका है प्रतिपल निर्मल।

देश है बेटी,राष्ट्र है बेटी
जन,गण,मन का मान है बेटी
संविधान भारत की बेटी
नवयुग का निर्माण है बेटी।
~~~अनिल कुमार मिश्र
‘आञ्जनेय’
गाँधी नगर पूरब
हज़ारीबाग़,झारखण्ड

Votes received: 6
203 Views
Copy link to share
अनिल कुमार मिश्र शिक्षा-एम ए अंग्रेज़ी,एम ए संस्कृत,बी एड जन्म 9.6.1975,राँची,झारखंड विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ... View full profile
You may also like: