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बेटी

बेटी है आधार जगत का
बेटी से है सार जगत का
बेटी देवी,बेटी सीता
बेटी बाइबल,कुरान और गीता।

बेटी में संसार छिपा है
जग का सारा सार छिपा है
बेटी के छुन-छुन पाँवों में
जीवन का सब अनुराग छिपा है।

बेटी सूरज बेटी चंदा
बिन बेटी जीवन है अंधा
बेटी प्रेम का दरिया छल-छल
मन उसका है प्रतिपल निर्मल।

देश है बेटी,राष्ट्र है बेटी
जन,गण,मन का मान है बेटी
संविधान भारत की बेटी
नवयुग का निर्माण है बेटी।
~~~अनिल कुमार मिश्र
‘आञ्जनेय’
गाँधी नगर पूरब
हज़ारीबाग़,झारखण्ड

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Competition Name: "बेटियाँ" - काव्य प्रतियोगिता

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अनिल कुमार मिश्र
अनिल कुमार मिश्र
हज़ारीबाग़,झारखण्ड
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