Skip to content

बेटी

Shravan Sagar

Shravan Sagar

गज़ल/गीतिका

January 17, 2017

$ बेटी का आँगन $

एक सफर,
जिसकी शुरुआत होने को है।
अग्नि को साक्षी मानकर,
सात फेरों से होते हुये…
सात जन्मों का बंधन।
हर फेरे में,
साथ जीने की कसमें।
एक दूसरे के साथ..रहने का वादा,
और उसमें डूबा हुआ…प्रणय निवेदन।
एक दूजे के हर पल में शामिल,
हर कदम साथ चलने को आतुर,
और एक अटूट विश्वास,
कभी भी अलग न होने की खातिर।
ढेरों यादों को बनाने,
और उनको सहेजने के लिये…..
हर लम्हे में अपनों की यादें,
और पीछे छूटता वो बचपन…
सखी-संगियों की याद,
और आंसुओं में भीगा,
बाबुल के आँगन का हर कोना।
जहाँ बीता बचपन..भाई बहन के साथ।
वो माँ की लोरी की गूँज..जो बजती है…
अब भी कानों में।
सब कुछ तो पीछे छोड़कर..जाना है।
एक नये युग की शुरुआत में,
अपनों की छाँव और उनका आशीर्वाद
सदा रहे मेरे साथ..
बस बचपन का सफर पूरा हुआ।
अब नयी बगिया में जाना है,
नये घर को सजाना है।
बस भूल न जाना इस बगिया के फूल को..
आप सब रहना मेरी छाया और विश्वास बनकर।
एक नये युग की तलाश में,
भविष्य की बाहों में,
जाने को उत्सुक…
और इसी उत्सुकता में।
जीवंत होता जाता मेरा प्यार…

:-: श्रवण सागर :-:

Share this:
Author
Shravan Sagar

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you