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बेटी

संगीता शुक्ला

संगीता शुक्ला

कविता

January 13, 2017

शक्ति का संचार है बेटी
भक्ति का द्वार है बेटी
मुक्ति का मार्ग है बेटी
सृजन संसार है बेटी
मन का भाव है बेटी
रामायण का पाठ है बेटी
गीता और कुरान है बेटी
गीत भी संगीत भी बेटी
चेहरे की मुस्कान है बेटी
मस्जिदों की अज़ान है बेटी
अभिमान है, सम्मान है बेटी
ग्रंथो की हर पंक्ति है बेटी
न जाने क्या क्या है बेटी
फिर भी ?
न जाने क्यों शोषित है बेटी
गर्भ में क्यों मर रही है बेटी
तलाक से क्यों लड़ रही है बेटी
क्यों जीवित अभिशाप है बेटी

माँ अगर सम्मानित है सभी
साहित्य की विधाओ और शायरी में
क्यों भूल जाते है सब वह भी थी बेटी

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