Skip to content

बेटी (ग़ज़ल)

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गज़ल/गीतिका

December 12, 2017

बेटी है कोमल बड़ी पलकों पे पलनी चाहिए
यूँ न आंखों में नमी इसके मचलनी चाहिए

दो कुलों का मान रखती बेटियाँ ही हैं यहाँ
हर दुआ इनके लिये दिल से निकलनी चाहिए

जब बदलते जा रहे हैं वक़्त के ही साथ हम
बेटियाँ हैं बोझ फिर ये बात खलनी चाहिए

बेटियों भी चाहती हैं पानाअपना ही गगन
अब हमारी सोच उनके साथ चलनी चाहिए

मानते हो बेटियों को देवियों सा तुम अगर
अब न कोई कोख में फिर यूँ कुचलनी चाहिए

बेटियाँ सुन ‘अर्चना’होती पराया धन नहीं
रीत है ये तो पुरानी अब बदलनी चाहिए

12-12-2017
डॉ अर्चना गुप्ता

Share this:
Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
Recommended for you