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बेटी है श्रिष्टा का आधार

DrRaghunath Mishr

DrRaghunath Mishr

गीत

January 27, 2017

बेटी है श्रिष्टि का आधार।
बेटी स्वयम् है अथाह प्यार।

बेटी का अनादर पाप।
अनदेखी घोर अभिशाप।
अभागे हैं वे यकीनन,
जो मारते हैं चुपचाप।
भ्रूण हत्या पशुवत व्यवहार।
बेटी है श्रिष्टि का आधार।

बेटी बेटे सेस ज्यादा।
पक्का है उसका वादा।
हरगिज नहीं बदला कभी,
बेटी का लौह इरादा।
बेटी में है ममता अपार।
बेटी है श्रिष्टि का आधार।

बेटी से संसार बना।
है उससे अभिमान घना।
वह पकड़े रहती कसके,
उससे जगताधार तना।
‘सहज’ गिनाए न ओ उपकार।
बेटी है श्रिष्टि का आधार।
@डा०रघुनाथ मिश्र ‘सहज’
अधिवक्ता /साहित्यकार
सर्वाधिकार सुरक्षित

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Author
DrRaghunath Mishr
डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज' अधिवक्ता/साहित्यकार/ग़ज़लकार/व्यक्तित्व विकास परामर्शी /समाज शाश्त्री /नाट्यकर्मी प्रकाशन : दो ग़ज़ल संग्रह :1.'सोच ले तू किधर जा रहा है 2.प्राण-पखेरू उपरोक्त सहित 25 सामूहिक काव्य संकलनों में शामिल

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