कविता · Reading time: 1 minute

बेटी माँ से कहे@@ हाथ पीले कर दो न माँ @@@@@

ओ माँ, यह हाथ पीले सुना है बहुत
क्या बता सकती है तू , होता है यह क्या
कल रात शादी में पड़ोस में सब कह रही थी
अच्छा हुआ , की हाथ पीले हो गए उसके, !!

ओ माँ, तून बता न, कब होंगे हाथ पीले मेरे
ला हल्दी , कर जल्दी ,मेरे मन को शांत कर
कितना आसान है, हाथ को ऐसे पीले करना
नहीं जो जाकर रसोई से में ले लूंगी हल्दी !!

सुनकर इस बात को मन बड़ा व्याकुल हुआ
अपनी नन्ही सी जान ने यह क्या धमाल किया
अगर होता बेटी सब वो सामान, तो कर देती आज
बना लेती तेरा इक आशियाना , ले आती घर मेहमान !!

इक छोटी सी पूँजी से, कैसे होगा यह समाधान
बस बेटी तेरा यह काम जल्द ही करेंगे भगवान्
तुझ को वो सब मिले, जो न मिल सका तेरी माँ को
तेरा दामन सदा खुशिओं से भरा रहे, बस सब मिले तुझको !!

डर लगता है, की जब हो जायेंगे हाथ तेरे पीले बेटी
न जाने कैसा मिलेगा वर, घर तुझको ओ मेरी बेटी
बड़े नाजो से पाला है तुझको हम ने मिल कर ओ बेटी
जिस तरहां से इस घर खेली, बस वैसा ही मिल जाये बेटी !!

अरमान बहुत हैं दिल में, तेरा सदा सुखी रहे घर द्वार
हर ख़ुशी सदा तेरे आँगन में मिले तेरा चलता रहे संसार
तुझे हाथो में उठा कर रखे वो , जो तेरा बने वह प्यार
“अजीत” तुझे सदा मिलता रहे , हमारा शुभाशीष !!

अजीत तलवार
मेरठ

Competition entry: "बेटियाँ" - काव्य प्रतियोगिता
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Author
शिक्षा : एम्.ए (राजनीति शास्त्र), दवा कंपनी में एकाउंट्स मेनेजर, कविता, शायरी, गायन, चित्रकारी की रूचि है , Books: तीन कविता साहित्यापेडिया में प्रकाशित हुई है..यही मेरा सौभाग्य रहा है…
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