बेटी बहुत बड़ी है

नहीं पुरुष से छोटी बेटी, बेटी बहुत बड़ी है
जीवन की हर मुश्किल से, सीना तान लड़ी है
धरती के हर घर आंगन में
अथाह सागर और नील गगन में
कदम कदम मानव जीवन में
सुख दुख हर गहरी उलझन में
जो हरदम साथ खड़ी है
एक बेटी ही तो है, जो वाकई बहुत बड़ी है
जीवन की हर मुश्किल से, सीना तान लड़ी है
नव सृष्टि की देवी है
घर संसार की सेवी है
प्रेम और बात्सल्य लुटाती
जीवन गीत सुनाती है
प्रेम और करुणा की मूरत, आंचल फैलाए खड़ी है
नहीं पुरुष से छोटी बेटी, बेटी बहुत बड़ी है
जीवन के हर क्षेत्र में
ऊंचाई लिए उड़ी है
कमजोर नहीं बेटी का जज़्बा
बेटी फौलाद ढली है
नहीं पुरुष से छोटी बेटी, बेटी बहुत बड़ी है
अपार कष्ट सहकर जीवन में, हंसते-हंसते खड़ी है

सुरेश कुमार चतुर्वेदी

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