बेटी तुझे बचाऊँगा मैं

दृढ़ निश्चय कर लिया है,
भेदभावी दीवार गिरा के,
दुनिया तुझे दिखाऊँगा मैं,
हाँ बेटी तुझे बचाऊँगा मैं ।

कलम की धार से ,
काट…झड़े रूढ़ियों की,
जुल्मी से लड़ जाऊँगा मैं,
हाँ बेटी तुझे बचाऊँगा मैं ।

कभी माँ,कभी बहू
तो कभी,
गीत बेटी के गाऊँगा मैं,
हाँ बेटी तुझे बचाऊँगा मैं ।

दे प्रहार शब्द बाणों का,
अपराधी को…
दोष ज्ञान कराऊँगा मैं,
हाँ बेटी तुझे बचाऊँगा मैं ।

चिटठा ले शब्दों का,
निकल गया हूँ देश में,
हर घर पहुँच जाउँगा मैं,
हाँ बेटी तुझे बचाऊँगा मैं।

बिन बेटी….
बंजर सी हो रही धरा पर,
फिर से काली खिलाऊँगा मैं
हाँ बेटी तुझे बचाऊँगा मैं।

जन्म के बाद भी,
डर नहीं होगा तुझे,
हक़ बराबरी का,दिलाऊँगा मैं,
हाँ बेटी तुझे बचाऊँगा मैं।

पढ़ शब्द श्याम के…
अबला से सबला हो जायेगी तू,
रचना ऐसी लिख जाऊँगा मैं,
हाँ बेटी तुझे बचाऊँगा मैं।

तू अकेली लड़ जायेगी,
गुंडा, चोर, लफंगों से,
शक्तिरूपा बनाऊँगा मैं,
हाँ बेटी तुझे बचाऊँगा मैं ।

तू धरती लोक की परी
देख तुझे तरसेगा बेटा..
कि जन्म बेटी का पाउँगा मैं,
हाँ बेटी तुझे बचाऊँगा मैं ।
……✍ श्यामसुन्दर
मुण्डवा (नागौर),राजस्थान

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