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बेटी के बोल

मधुसूदन गौतम

मधुसूदन गौतम

गज़ल/गीतिका

January 10, 2017

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*उन्वान बेटी*
221 2122 221 2122
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इक बात पूछना है इतना मुझे बता दो।
* ( इतना मुझे बता दो।)
इक प्रश्न पर पड़ा जो पर्दा उसे हटा दो।
** (पर्दा उसे हटा दो) 00
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हे शुक्र आपका जो ,मुझको नही है मारा।
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लड़की के नाम पर भी, मुझको नही लतारा।
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अच्छी है बात माँ की ,सारा जहां गवाह’ दो।***( सारा जहां गवाह’ दो।)
इक प्रश्न……..
.01
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बैठी हूँ ‘आज मैं जो, ऊँची जमा के’ कुर्सी।
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यह जीत है तुम्हारी, या है खुदा की’ मर्ज़ी।
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बिटिया की’ राह माना, फूलो से’ तुम सजा दो।
****( फूलो से तुम सजा दो। )
इक प्रश्न पर पड़ा …………………..02
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बेटी हूँ’आपकी मैं,यह बात जानती हूँ।
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नाजो से’ मुझको’ पाला ,यह बात मानती हूँ।
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कर्ज़ा किया पढ़ाइम ,मेरी उसे चुका दो।
***( मेरी उसे पटा दो।)
इक प्रश्न पर पड़ा…………………….03
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बेटी हूँ’आपकी मैं ,इस बात का मजा है।
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होना मगर बेटा ,किस पाप की सजा है।
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बेटे को’ भी पढ़ाओ ,यह घोष तो उठा दो।
****( यह घोष तो उठा दो)
..04
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फिरता है भाई’ मारा ,मारा जहां में पापा।
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भैया को क्यों सताया, बतला दो’ आज पापा।
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जो भेद यह बना है ,पापा उसे मिटा दो।
***( पापा उसे मिटा दो।)
इक प्रश्न…..05
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करता है कौन बोलो , आँखों में भेद ऐसे।
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इक आँख तो बड़ी है,छोटी है एक कैसे।
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क्या बात यह है जायज़ ?पापा मुहर लगा
दो। ( पापा मुहर लगा दो। )
***
इक प्रश्न पर पड़ा……………………06
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सन्तान कीमती है, बेटा हो’ या हो’ बेटी।
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इतनी सी बात भी जो, माथे में क्यों न बैठी।
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दोनों के मामले भी ,है एक तुम रटा दो।
***( है एक तुम रटा दो।)
इक प्रश्न पर पड़ा जो पर्दा वही हटा दो।07
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लड़के के’ नाम पर या, लड़की के’ नाम से फिर।
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क्यों भेदभाव करते , लिंगानुसार सब फिर।
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कब तक समझ बनेगी ,कोई जवाब लादो।
*** ( कोई जवाब लादो।)
इक प्रश्न……………………………… 08
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यह शोर जो उठे है ,बेटी को सब बचाओ।
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जितना भी’ हो सके है,उतना उसे पढ़ाओ।
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लेकिन नही पढ़ाओ ,बेटे को क्यों ? सुना दो।
****( बेटे को क्यों ? सुना दो। )
इक प्रश्न…………………………… 09
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धरती को’बाँटकर के, सागर को’ भी है’ बांटा।
*
मजहब के’ नाम से फिर, जाती के’नाम बांटा।
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कब तक गिरोगे इंसा ,जो लिंग पर बॅटा दो।
***( लिंग पर बटा दो।)
इक प्रश्न………………………………10
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मधु सूदन गौतम
कोटा राजस्थान
324005
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ऊपर की पोस्ट का विधान काव्य ~गीतिका
वाचिक मापनी
221 2122 221 2122
(कुछ जगह शब्द पर ‘ का चिन्ह स्वर दबाकर गाने का संकेत है।)
( सहायक फ़िल्मी धुन~ हो रात के मुसाफिर चन्दा…..या फिर~~मौसम है आशिकाना ……..
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***** मधुसूदन गौतम

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Author
मधुसूदन गौतम
मै कविता गीत कहानी मुक्तक आदि लिखता हूँ। पर मुझे सेटल्ड नियमो से अलग हटकर जाने की आदत है। वर्तमान में राजस्थान सरकार के आधीन संचालित विद्यालय में व्याख्याता पद पर कार्यरत हूँ।

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