Skip to content

बेटी की विदाई

विनोद कुमार दवे

विनोद कुमार दवे

गीत

January 11, 2017

• बेटी की विदाई

बेटी जब-जब सपना देखे
बाबुल का घर अपना देखे
घर में जब भी अंधियारा था
बेटी ने किया उजियारा था

उस घर को ही छोड़ चली
चुनर अश्कों की ओढ़ चली।

चिड़ी चहकना भूल गई
पौधे सब मुरझाए है
तितली के रंग फीके पड़ गए
आंगन के फूल कुम्हलाए है

अपने ही घर से मुख मोड़ चली
चुनर अश्कों की ओढ़ चली।

चूल्हे की आग भी ठंडी पड़ी
रसोई की रौनक चली गई
पायल की छनछन कहाँ गई
चूड़ी की खनक चली गई

गीतों की सरगम तोड़ चली
चुनर अश्कों की ओढ़ चली।

बापू की थाली कौन लगाए
कौन माँ से रूठेगा
छोटी बहना को कौन मनाए
भया किस से झगड़ेगा

पिया से रिश्ता जोड़ चली
चुनर अश्कों की ओढ़ चली।

अब ससुराल ही रहना होगा
उसे अपना घर कहना होगा
पीहर पराया न हो पाएगा
प्यारी यादें न खो पाएगा

बाबुल का आँगन छोड़ चली
चुनर अश्कों की ओढ़ चली।

Author
विनोद कुमार दवे
परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। 4 साझा संकलन प्रकाशित एवं 17 साझा संकलन प्रकाशन... Read more
Recommended Posts
हे ईश्वर तूने क्या किया मेरी बेटी पराई हो गई
?क्यो बेटी पराई हो गई? हे ईश्वर तूने क्या किया मेरी बेटी पराई हो गई| बचपनसेपाला है जिसकोअब बही पराई होगई|| ???? तू कैसा निर्दयी... Read more
पतझड़ से बहार
तेरे प्यार की कस्ती में सवार हो चली हूँ में पतझड़ सी थी में अब बहार हो चली हूँ में एक नजर जो डाली मुझपर... Read more
जिंदगी
"इक उम्र जिंदगी से मिलाती चली गई, दामन में सख्त गिरहें लगाती चली गई, दुनिया के रंगमंच पर अभिनय बहुत किया, ये कोशिशें ही आस... Read more
कातिल  तेरी मुस्‍कान यह अजब खेल कर गई  , हर लिया हमारा दिल क्‍या गजब खेल वह कर गर्इ,
कातिल तेरी मुस्‍कान यह अजब खेल कर गई , हर लिया हमारा दिल क्‍या गजब खेल वह कर गई , मुस्‍कुरा कर हमारे लिए मुश्‍किले... Read more