.
Skip to content

बेटी का दर्द-अपना समझती हूँ मैं

sushil sharma

sushil sharma

कविता

January 14, 2017

बेटी का दर्द-अपना समझती हूँ मैं
सुशील शर्मा

रोपित किया तुमने मुझे पुत्र की चाह में।
फिर भी तुम्हारे अनचाहे प्यार को अपना समझती हूँ मैं।
पीला जर्द बचपन स्याह बन कर गुजर गया।
माँ के सशंकित प्यार को अपना समझती हूँ मैं।
अपने हिस्से का भी उसको छुप कर खिलाया था।
उस भाई की बेरहम मार को अपना समझती हूँ मैं।
कर दिया विदा मुझे अपने घर से अनजान के साथ।
उस अजनबी घर के बुरे व्यवहार को अपना समझती हूँ मैं।
जिसे छाती से चिपका कर अपना लहू पिलाया था।
उस पुत्र दुत्कार को अपना समझती हूँ मैं ।
कभी यशोधरा कभी सीता कभी मीरा सी ठुकराई।
सभी बुद्धों ,सभी रामों सभी गैरों को अपना समझती हूँ मैं ।
चाह कर भी न कर सकी प्रतिरोध इन सबका।
सभी अन्यायों आक्रोशों को अपना समझती हूँ मैं।
देह के रास्ते से गुजरे सभी रिश्ते।
हर रिश्ते से उभरे घाव को अपना समझती हूँ मैं।
सामाजिक दायरों में जहाँ रिश्ते सिसकते हों।
उस डरी ,सहमी ,सुबकती औरत को अपना समझती हूँ मैं।

Author
sushil sharma
सुशील कुमार शर्मा S/o श्री अन्नीलाल शर्मा ज्ञानदेवी शर्मा शिक्षा-M Tech(Geology)MA(English) पारिवारिक परिचय पत्नी-डॉ अर्चना शर्मा साहित्यिक यात्रा-देश विदेश की विभिन्न पत्रिकाओं समाचार पत्रों में करीब 500 रचनाएँ प्रकाशित। मेरी पांच पुस्तकें प्रकाशनाधीन1.गीत विप्लव2.विज्ञान के आलेख3.दरकती संवेदनाएं4.सामाजिक सरोकार 5.कोरे पन्ने(हाइकु... Read more
Recommended Posts
मैं बेटी हूँ
???? मैं बेटी हूँ..... मैं गुड़िया मिट्टी की हूँ। खामोश सदा मैं रहती हूँ। मैं बेटी हूँ..... मैं धरती माँ की बेटी हूँ। निःश्वास साँस... Read more
मैं हूँ
सारे इंतज़ार की जड़ मैं हूँ हर ज़रूरत की तलब मैं हूँ गुज़रते हुए लम्हे की एक सोच दिल मे जो घर कर जाए, मैं... Read more
मुक्तक
तेरे हुस्न का मैं अफसाना लिए रहता हूँ! तेरे प्यार का मैं नजराना लिए रहता हूँ! मैं रोक नहीं पाता हूँ यादों का कारवाँ, तेरे... Read more
"अब तो मैं.... डरता हूँ" (शेर) 1. मैं कहाँ अदावत से डरता हूँ मैं तो बस ज़िलालत से डरता हूँ इतना लूटा गया हैं मुझे... Read more