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बेटी :: एक विचार

Arun Pradeep

Arun Pradeep

कविता

January 14, 2017

बेटी :: एक विचार
— अरुण प्रदीप

सृष्टि रचना के समय
पुरुष ने जब देखा होगा
सर्वगुण संपन्न प्रकृति को
तभी उपज होगा उसमें हीन भाव
और सोच डालें होंगे
उसे गौण दिखाने के सारे पेंच – दांव
बना डाले होंगे अनगिन षडयंत्र
ताकि भूल जाएँ सब
” यत्र नार्यस्तु ..”का सुमंत्र !
चाहा उसने बनाना
समाज पुरुष प्रधान
और बेटी रूपी प्रकृति को
देने लगा दोयम स्थान !
धन – बल – ज्ञान की देवी बेटी
तुम अपना पहचानो स्वरुप
अपनी शक्ति के बल पर
बदल डालो समाज का रूप
स्वयं शक्ति स्वरूपा हो तुम
तुम ही हो जग कल्याणी
तुम सी अनगिन बेटियों ने
लिख डाली हैं नयी कहानी !
####

Author
Arun Pradeep
Though a science master by education, a tax collector by work did write in Hindi n English since 1970. Got published in print media since 1970 intermittently! Now a retired person, pursuing my hobby as writer!
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