बेटियों को प्यार दो

बेटियों को प्यार दो (गीतिका)
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बेटियों को प्यार दो,
जिन्दगी संवार दो।
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पुष्प बन ये खिल उठे,
इस तरह श्रृंगार दो।
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हैं अशक्त अभी तनिक,
शक्ति का आधार दो।
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खिलखिलाते स्वप्न को,
रूप तुम साकार दो।
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सह चुकी हैं पतझड़ें,
फागुनी उपहार दो।
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जिन्दगी का कीमती,
आज ही अधिकार दो।
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यह धरा भी गा उठे,
वो अमिट संस्कार दो।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "बेटियाँ"

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