.
Skip to content

बेटियॉ

NIRA Rani

NIRA Rani

कविता

January 10, 2017

बेटियॉ ..
वेदों की माने तो गाथा हैं वो
किसना के साथ भोली राधा हैं वो
घर पे है तो मर्यादा है वो
युद्ध स्थल पे वीरांगना है वो

शत शत नमन उन बेटियों को
जो फलती कही है बढ़ती कही है
एक लता की भॉति विस्तार करती कही है

मर्दुल सी कोमल सी न जाने कितने काज संवारती है
एक बेटी जब जन्मती कितने रिश्ते नॉधती है ..

शक्ति रूपा /शा न्ति स्वरूपा ..
पर्याय बनना जानती है

अथक है अदम्य है अटूट है आवेश है
एक बेटी इन सभी का अवशेष है
हनन इसका करोगे तो कैसे जी पाओगे ?

स्रष्टी का आधार यही है
वंश बेल कैसे बढ़ाओगे ?
तिरस्क्रित कर समाज मे कै से रह पाओगे ?

बेटी है तो कल है
बेटी नही तो ये मन बेकल है
घर कीं लछ्मी किसे बनाओगे
मान नही दोगे तो कैसे रह पाओगे ?

श्रद्धा सुमन का पात्र है ये
प्रेम और ममता का एहसास है ये
लाडो बन दिल मे उतर जाती है
असीम प्यार से सारे घर को महकाती है
अाओ शपथ ले लो आज
किसी बेटी को निर्भया नही बनाओगे
असमय ही काल के गर्त मे नही ले जाओगे

पूज्यनीय है वंदनीय है हर पल मान उनका बढ़ाओगे
हर पल मान उनका बढ़ाओगे ..

Author
NIRA Rani
साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..
Recommended Posts
वो
एक मुकम्मल जहांन सा है , वो सारी दुनियां से कुछ जुदा है ,वो कितने दिल उसपे आज मरते हैं जाने क्यूँ मुझ पे ही... Read more
मुझे वो दिन बहुत याद आते है
Sonu Jain कविता Oct 30, 2017
वो बचपन के दिन ।। वो हँसना खिलखिलाना ।। वो खेल खिलौनो से खेलना ।। वो रोना फिर मनना ।। मुझे वो दिन बहुत याद... Read more
तुम से कुछ कहना है
**सुनो ** आज तुम से कुछ कहना है क़ौन हो तुम मेरे लिये ये सब पूछ रहे है जरा उन को भी हाल ए दिल... Read more
स्कूल की छुट्टी के बाद से जब, हम अपने घर को आते थे., कदम-कमद पर मेरे पाँव, कही...ठहर से जाते थे., जब अपने सखियों के... Read more