बेटियां

मंदिर मस्जिद टेका माथा,
कर मिन्नतें सबको साधा,
तब…..
एक छोटी सी नन्ही कली,
मेरे घर आँगन में खिली,
लाई संग खुशियां हजार,
जीवन में आयी नई बहार,
वो हैं मन की भोली,
मीठी हैं उसकी बोली,
रहती बनकर सुख की छाया,
बेटी नहीं तो कुछ नहीं पाया,
बेटी हैं धरा का आधार,
करती हैं सपने साकार,
फिर क्यों……………..
सुत की चाहत में सुता को मारते,
सुत सुता में इतना अंतर पालते,
जग को निहारने से पहले ही रौंदते,
एक नन्ही कली को खिलने से रोकते,

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "बेटियाँ"

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