Jul 28, 2016 · मुक्तक
Reading time: 1 minute

बेटियां…….

उदासी छाई हो तो खुशनुमा मंजर बनातीं हैं,
हमारी ज़िंदगी को और भी बेहतर बनातीं हैं|
अभागे हैं जो हरदम बेटियों को कोसते रहते,
अरे ये बेटियाँ ही हैं जो घर को घर बनाती हैं|–आरसी

2 Comments · 4 Views
Ramesh chandra Sharma
Ramesh chandra Sharma
34 Posts · 2.6k Views
Follow 1 Follower
गीतकार गज़लकार अन्य विधा दोहे मुक्तक, चतुष्पदी ब्रजभाषा गज़ल आदि। कृतिकार 1.अहल्याकरण काव्य संग्रह 2.पानी... View full profile
You may also like: