मुक्तक · Reading time: 1 minute

बेटियां…….

उदासी छाई हो तो खुशनुमा मंजर बनातीं हैं,
हमारी ज़िंदगी को और भी बेहतर बनातीं हैं|
अभागे हैं जो हरदम बेटियों को कोसते रहते,
अरे ये बेटियाँ ही हैं जो घर को घर बनाती हैं|–आरसी

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