बेटियां

अच्छे कर्मो से ही तेरे घर में बेटी आती है,,,,,,,,,,
तेरे सूने घर में खुशियाँ बस बेटी ही लाती है ।।।।।।
उसके कारण ही तो तूने अपना हर गम भूला है,,,,,
तेरी बाहोँ में चुपके से वो जब भी मुस्काती है ।।।।।।।
शादी होके तेरी बेटी देश पिया के जाएगी,,,,,,,,
तेरे सीने में बिछड़न का ऐसा दर्द जगाती है ।।।।।।।।
कन्यादान करेगा कैसे हिम्मत तेरी टूटेगी,,,,,,,,,,
माँ बापो के दिल की उस दिन धड़कन भी रुक जाती है।।।।।।।।
तुझको भी करना है ये सब चाहे तू रोले कितना,,,,,,,
तू जी भर के देख उसे जो पल दो पल का साथी है ।।।।।।।।।।।
देके खुशियाँ हाथो मे बेटी भेजी है दूजे घर ,,,,,,,,
लेकिन तेरी यादे बेटी हमको रोज़ सताती है ।।।।।।।

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "बेटियाँ"

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