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बेटियां

शैलेन्द्र खरे

शैलेन्द्र खरे"सोम"

गीत

January 30, 2017

* गीत *
(तर्ज- न हम बेवफ़ा हैं न ……)

कम बेटियाँ हैं, नम बेटियाँ हैं…
ईश्वरका सब पर,करम बेटियाँ हैं…

1-बेटी तो रौनक होती है घर की।
रंगत है बिटिया माँकी नज़र की।।
अपने पिता का भरम बेटियाँ है…कम..

2-होती है बेटी सीधी व सच्ची।
बेटे से हर शय बेटी है अच्छी।।
बेटे जखम तो मल्हम बेटियाँ हैं…कम..

3-सारे जहाँ की आभा समेटी।
तब जाके रबने बनाई है बेटी।।
“शैलेन्द्र”दुनिया का दम बेटियाँ हैं..कम..

~शैलेन्द्र खरे”सोम”

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