बेटियां

हर जगह अपना नाम कमा रही हैं बेटियां।
घर की ज़िम्मेदारी उठा रही हैं बेटियां।

ब्याह के जब यह मायके को छोड़ जाती हैं;
ससुराल में भी फर्ज़ निभा रही हैं बेटियां।

मौका अगर मिल जाए कुछ कर गुज़रने का तो;
आसमान को छूलें दिखा रही हैं बेटियां।

घर और बाहर हर जगह मेहनत करती हैं;
सुन्दर ख्वाब पलक पे सजा रही हैं बेटियां।

दो घरों की आन औ’शान होती हैं यह तो;
हुनर से सबका मान बड़ा रही हैं बेटियां।

कामनी गुप्ता***
जम्मू!

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