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बेटियां

Santosh Khanna

Santosh Khanna

कविता

January 25, 2017

जब से बता दिया है उसे
नही है भेद
लड़का हो या लड़की
वह चहकने लगी है
स्कूल मे , कालेज में
सेना में, कार्यलय में
ज्ञान के बड़े बड़े प्रांगणों मे
कार्य के बड़े बड़े संस्थानो मे
वह महकने लगी है
कविता में , कहानी में
नदी धारा की रवानी में
परिवार में , समाज में
राष्ट्र की अगवानी में
रचने लगी है इतिहास
देश के हर कोने से
आने लगी है आवाज
बेटियां हमारा सब कुछ हैं
प्यार हैं , दुलार हैं
नींव हैं, आधार हैं
मान हैं,सम्मान हैं
तुलना अगर करनी हो कभी
वह भगवान्-सी भगवान् हैं।

Author
Santosh Khanna
Poet, story,novel and drama writer Editor-in-Chief, 'Mahila Vidhi Bharati' a bilingual (Hindi -English)quarterly law journal
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