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बेटियां

Manoj Gupta

Manoj Gupta

कविता

January 18, 2017

पायल की रुनझुन में तितली की गुनगुन में
छत की मुंडेरों पे और घर के आँगन में
हँसती खिलखिलाती नज़र आती है बेटियां
खुशहाली ज़िन्दगी में लाती है बेटियां
है जगह कौन वो जहां पर बेटी नही है
किसी से भी कद में वह हेटी नही है
कदम कदम उन्नति के शिखर चढ़ रही
स्वयं के नित प्रयासों से आगे बढ़ रही
अहसास अपने होंनें का करवा रही है वो
एवरेस्ट पर भी झंडा फहरा रही है वो
छू रही वह आसमां कर हौंसला बुलंद
विमान भी गगन में उड़ाती है बेटियां
खुशहाली ज़िन्दगी में …………………….
बेटों की चाहत एक अच्छा ख्याल है
बेटी के जन्म से क्यूँ होता मलाल है ?
ऐसा बने समाज जहां बेटी विधान हो
घर का सारा कानून हो और संविधान हो
पिता की चिता को आग बेटी भी दे सके
परिवार के सुख दुःख का हक़ बेटी भी ले सके
माँ बहन का दुलार बाँट लेती है वह अगर
तो दुर्गा सा रौद्र रूप भी दिखाती हैं बेटियां
खुशहाली ज़िन्दगी में …………………….
दहेज़ का दानव भी अब बेटी मिटाएगी
समाज को सच्चाई का आइना दिखाएगी
बनकर सूरज अँधेरे को हटानें की शक्ति है
कहीं सत्यवान के लिए सावित्री की भक्ति है
सीता है, द्रोपदी है तो कही मीरा की पीर है
कहीं प्रेम पर मरनेँ वाली रांझे की हीर है
थैचर सी, इंदिरा सी और भंडारानायके सी बन
सारे जगत पर राज़ चलाती है बेटियां
खुशहाली ज़िन्दगी में …………………….
मनोज

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Author
Manoj Gupta

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