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बेटियां

शालिनीपंकज दुबे

शालिनीपंकज दुबे

कविता

January 17, 2017

कहते है दो कुलों को
जोड़ती है बेटियां
मुश्किलो को अक्सर
तोड़ती है बेटियां।

त्याग और समर्पण की
मूर्ति होती है बेटियां
मायका और ससुराल को
प्रेम से सींचती है बेटियां।

फिर बेटी से बहु के सफर में
क्यों भेदभाव सहती है बेटियां
ख्वाबों को अपने क्यों
आंखियों के नीर से धोती है बेटियां।
———-
#स्वरचित मौलिक
शालिनीपंकज दुबे

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Author
शालिनीपंकज दुबे
नाम-शालिनीपंकज दुबे शिक्षा-एमएससी-प्राणिशास्त्र,ऍम ए-समाजशास्त्र,डीएड व्यवसाय-शिक्षिका पढ़ना तो आज भी बहुत पसंद ,आर्टिकल लिखना स्कूल के समय से दैनिक भास्कर में ,निबंध इत्यादि पर कविता तो पहली बार लिखी जीवनसाथी के लिए सिर्फ शुद्ध मन के भाव थे प्रेम, शिकायत,उम्मीदे,और उनका... Read more
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