बेटियां

कहाँ नहीं है बेटियाँ
कहाँ नहीं थी बेटियाँ
कहाँ ना होंगी बेटियाँ
हरकाल ,सदी, वर्ष,पल-पल में
अपना परचम बेटियों ने लहराया है
इसलिए ईश्वर ने बेटियों को
सृष्टि का आधार बनाया है
चलो आधार मजबूत बनायें!
बेटियों को कूलदीप बनायें ।

महाकाव्य में सीता,शकुंतला
इतिहास में इंदिरा गांधी
और रानी लक्ष्मीबाई थी
इसबार ओलम्पिक मे भी सिन्धु, साक्षी बेटियां ही देश के लिए मेंडल लायी थी ऊंचे पर्वत एवरेस्ट को छू चुकी है बेटियां
चमकीले चांद पर भी पहुंच चुकी हैं बेटियां
ज़रा सोचो! इन्हीं बेटियों को हमने
कई बार कोख में मरवाया है
ईश्वर ने शायद इंसान के वेश में
हैवान को बनाया है
चलो ज़रा इंसान बन जाए !
बेटियों को कूलदीप बनायें ।

गर पल जायेगी बेटियां
पढ़ जायेगी बेटियां
बढ़ जायेगा घर,देश
चमक उठेगा भारत का भाग्य
गर मिट जायेगा अन्तर का यह क्लेश
जल है बेटियां ढल जाती हर सांचे में
जल प्राण जीवन कहलाया है
ईश्वर ने जल को जननी
शास्त्रों में बतलाया है
चलोअब अपनी जननी बचायें !
बेटियों को कूलदीप बनायें ।

Voting for this competition is over.
Votes received: 67
556 Views
You may also like: