Skip to content

बेटियां

Rajani Mundhra

Rajani Mundhra

कविता

January 12, 2017

कहाँ नहीं है बेटियाँ
कहाँ नहीं थी बेटियाँ
कहाँ ना होंगी बेटियाँ
हरकाल ,सदी, वर्ष,पल-पल में
अपना परचम बेटियों ने लहराया है
इसलिए ईश्वर ने बेटियों को
सृष्टि का आधार बनाया है
चलो आधार मजबूत बनायें!
बेटियों को कूलदीप बनायें ।

महाकाव्य में सीता,शकुंतला
इतिहास में इंदिरा गांधी
और रानी लक्ष्मीबाई थी
इसबार ओलम्पिक मे भी सिन्धु, साक्षी बेटियां ही देश के लिए मेंडल लायी थी ऊंचे पर्वत एवरेस्ट को छू चुकी है बेटियां
चमकीले चांद पर भी पहुंच चुकी हैं बेटियां
ज़रा सोचो! इन्हीं बेटियों को हमने
कई बार कोख में मरवाया है
ईश्वर ने शायद इंसान के वेश में
हैवान को बनाया है
चलो ज़रा इंसान बन जाए !
बेटियों को कूलदीप बनायें ।

गर पल जायेगी बेटियां
पढ़ जायेगी बेटियां
बढ़ जायेगा घर,देश
चमक उठेगा भारत का भाग्य
गर मिट जायेगा अन्तर का यह क्लेश
जल है बेटियां ढल जाती हर सांचे में
जल प्राण जीवन कहलाया है
ईश्वर ने जल को जननी
शास्त्रों में बतलाया है
चलोअब अपनी जननी बचायें !
बेटियों को कूलदीप बनायें ।

Share this:
Author
Rajani Mundhra

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साथ ही आपकी पुस्तक ई-बुक फॉर्मेट में Amazon Kindle एवं Google Play Store पर भी उपलब्ध होगी

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

सीमित समय के लिए ब्रोंज एवं सिल्वर पब्लिशिंग प्लान्स पर 20% डिस्काउंट (यह ऑफर सिर्फ 31 जनवरी, 2018 तक)

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you