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बेटियां हर घर की राजकुमारियां होती है ….

बेटियां सबको प्यारी होती हैं ,
बेटियां हर घर की राजकुमारियां होती है ।
नाज़ों से पालते है जिन्हें ,
बाबुल के बाग की नन्ही कलियां होती है ।
उनकी हर खुशी सर आंखों पर ,
वो आंखों का तारा होती है ।
उनकी खताओं को भी नजर अंदाज कर दें ,
क्योंकि माता पिता की लाडली होती है ।
बेटियां तो बेटियां होती है ,
सबकी सांझी होती हैं।
अगर बेटियां बेटियां होती है ,
तो नजरिए में इतना फर्क क्यों ?
बेटी के बहु बनते ही ,
विचारों में इतना अंतर क्यों ?
और यह मायके और ससुराल में भी ,
इतना अंतर क्यों ?
मायके की राजकुमारी ,
ससुराल में रानी क्यों नहीं ?
मायके में इतना लाड़ प्यार ,
तो ससुराल में क्यों नहीं !
मायके में वोह सबकी आंखों का तारा ,
तो ससुराल में क्यों नहीं ?
मायके में उसकी हर खुशी सर आंखों पर ,
तो ससुराल में क्यों नहीं?
मायके में हो सकती ही उसकी हर खता ,
नजर अंदाज तो ससुराल में क्यों नहीं ?
बेटियां तो बेटियां होती है ना !
फिर बहु बनते ही नजरिए में इतना फर्क क्यों ?
कौन खत्म करेगा यह मायके और ससुराल ,
का इतना गहरा फासला ?
यदि यह फैसला मिट जाए तो मायके या ससुराल ,
पक्ष का भेद खत्म हो जाएगा ।
और कसम से एक दूजे के लिए मन में ,
संदेह खत्म हो जाएगा ।

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Author
नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर। विधा -- ग़ज़ल, कविता , लेख , शेर ,मुक्तक, लघु-कथा , कहानी इत्यादि . संप्रति- फेसबुक…
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