Feb 13, 2021 · कविता
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बेटियां स्कूल जा रहीं हैं

आज देखा मैंने
अपने घर की दहलीज से
बेटियों के समवेत लघु समूह
भिन्न , तय परिधानों में
प्रसन्नमना हो
बतियाते कलरव करते जाते हुए ।
और अनुभव की
उनकी आंखों से
छलकती खुशियां
बेटियां कितनी प्यारी लगती हैं
उल्लास से भरी
भविष्य संवारने की चाह लिए
विद्यालय की ओर
जाती हुई ।
वासंती हवाएं गुनगुनाती हुई
बता रही हैं
बेटियां फिर
विद्यालय जा रहीं हैं ।

अशोक सोनी
भिलाई ।

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अशोक सोनी
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