" बेटियां ".............

” बेटियाँ “
————
ये पूछो मत मुझसे क्या होती है बेटी
न शब्द न परिभाषा में बंधती है बेटी।
*
चिड़िया नहीं, ममता से भरी मानव है
हँसते हुए बहुत कुछ सहती है बेटी ।
*
सबको अपना समझती,कहाये ‘परायी’
परिवार से बहुत लगाव रखती है बेटी ।
*
खुद दु:ख सहकर भी खुशी देती है
अपने दर्द बयां कम करती है बेटी ।
*
दूर रहकर भी दिल में रखती सबको
स्नेह भरा दिल,पर भावुक होती है बेटी।
*
भावुक कर देती , जाती जब ससुराल
दो कुल को आपस में जोड़ती है बेटी ।
*
दर्जा बराबरी का दंभ भरता समाज पर
घर में भी इससे वंचित रहती है बेटी।
*
कटु सत्य,आज भी कम खुशी होती
‘मन में’ घर में जब जन्म लेती है बेटी।
*
” काश, बेटी न होकर होती मैं भी बेटा “
इसी विडंबना से घायल सोचती है बेटी ।
*
शब्द कम हैं, कहूं ‘बेटियों’ के बारे में
साहस अदम्य फिर भी सहमती है बेटी।
*
गर सुविधा मिले आगे बढ़ने की “पूनम”
तो हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती है बेटी
स्वरचित:-पूनम झा।कोटा,राजस्थान
###################

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "बेटियाँ"

Voting is over for this competition.

Votes received: 30

Do you want to publish your book?

Sahityapedia Publishing's publishing package only in ₹ 9,990/-

  • Premium Quality
  • 50 Author copies
  • Sale on Amazon, Flipkart etc.
  • Monthly royalty payments

Click this link to know more- https://publish.sahityapedia.com/pricing

Whatsapp or call us at 9618066119 (Monday to Saturday, 9 AM to 9 PM)

*This is a limited time offer. GST extra.

Like 1 Comment 0
Views 684

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing