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बेटियां एक सहस

TARUN PAWAR

TARUN PAWAR

कविता

January 22, 2017

बेटी ही लती है घर में,
खुशियों का अनुपम उपहार।
बेटी से ही होता निर्मल,
पावन सकल ये घर संसार।।1।।

मातपिता की सेवा करना,
उनके जीवन का आधार।
बेटी है करुणा की मूरत,
जग मानें इनका आभार।।2।।

बिन बेटी सुना है आँगन,
सृस्टि सारी है बिन विस्तार।
जन्म लिया जिस घर बेटी ने,
वो घर पुण्यों का भंडार।।3।।

बेटी दुर्गा सरस्वती रूपा,
इनकी महिमा है अपार।
बेटी को जिसने भी पूजा,
वो होता भवसागर पार।।4।।

बेटी संकट के हर क्षण में,
करती कोमलता व्यवहार।
अपने साहस और शौर्य से,
करती दुष्टों का संघार।।5।।

बेटी को दो लालन पालन,
दो उनको तुम प्यार दुलार।
एक दिन बेटी ही करेगी,
सारे सपनों को साकार।।6।।

Author
TARUN PAWAR
कविताऐं लिखना तथा लेख लिखना मेरा शौक है मेरा साहित्य के प्रति अत्यधिक झुकाव भी है
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