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बेटियां एक सहस

बेटी ही लती है घर में,
खुशियों का अनुपम उपहार।
बेटी से ही होता निर्मल,
पावन सकल ये घर संसार।।1।।

मातपिता की सेवा करना,
उनके जीवन का आधार।
बेटी है करुणा की मूरत,
जग मानें इनका आभार।।2।।

बिन बेटी सुना है आँगन,
सृस्टि सारी है बिन विस्तार।
जन्म लिया जिस घर बेटी ने,
वो घर पुण्यों का भंडार।।3।।

बेटी दुर्गा सरस्वती रूपा,
इनकी महिमा है अपार।
बेटी को जिसने भी पूजा,
वो होता भवसागर पार।।4।।

बेटी संकट के हर क्षण में,
करती कोमलता व्यवहार।
अपने साहस और शौर्य से,
करती दुष्टों का संघार।।5।।

बेटी को दो लालन पालन,
दो उनको तुम प्यार दुलार।
एक दिन बेटी ही करेगी,
सारे सपनों को साकार।।6।।

स्वरचित कविता
तरुण सिंह पवार

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Competition Name: "बेटियाँ" - काव्य प्रतियोगिता

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तरुण सिंह पवार
तरुण सिंह पवार
सिवनी (मध्य प्रदेश)
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साहित्य समाज का दर्पण होता है इसी दर्पण में भिन्न भिन्न प्रतिबिम्ब दिखाई देते है...