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बेटियां ..एक बेटी का सपना

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कविता

January 10, 2017

छू लूँगी गगन एकदिन,मत मारो मुझे कोख पावन में।
फूल-सी खिलने दो मुझको,तुम दुनिया के चमन में।।
रिश्तों की लाज की सूरत,मैं बसाऊँगी आँखों में।
कल्पना की कल्पना कर खुद कल्पना हो जाऊँगी आँखों में।
आँखों में रहेगा मंजर मेरा यूँ ज्यों मोर नाचे भूवन में।
फूल-सी खिलने दो मुझको,तुम दुनिया के चमन में।
अहिल्या,लक्ष्मी,इंदिरा,सरोजिनी और सावित्री फूले।
चाँद-सी चमकी हैं ये इन्हें भूला हैं न कभी कोई भूले।
मैं भी चलूँगी नक्शे-कदम इनके,लक्षित कर लक्ष्य नयन में।
फूल-सी खिलने दो मुझको,तुम दुनिया के चमन में।
माँ मेरी,कल थी चाह तेरी,आज है वही मन में चाह मेरी।
दे जन्म,कर खुशी से पालन-पोषण,हो पूर्ण यही इच्छा मेरी।
देखना,उमंग,तरंग,खुशियों के रंग बिखरेंगे घर-आँगन में।
फूल-सी खिलने दो मुझको,तुम दुनिया के चमन में।
बेटे से तो बेटी रहती है “प्रीतम” सदा दो कदम आगे।
बेटा एक,बेटी दो घरों को सँंवारे,क्यों न प्यारी लागे।
एक बेटी का सपना होगा पूरा संसार के शुभ मिलन में।
फूल-सी खिलने दो मुझको,तुम दुनिया के चमन में।
छू लूँगी गगन मैं एकदिन,मत मारो मुझे कोख पावन में।
राधेश्याम “प्रीतम” कृत मौलिक रचना
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