बेटियाँ

एक पुत्र को जन्म दूँ, रही सभी की चाह।
दो बेटी की माँ बनी, मुझे नहीं परवाह।। १

मुझे मिली जब बेटियाँ, समझ न आई बात।
जग ने ताने दी बहुत, किया बहुत आघात।। २

जन्म लिया बेटा जहाँ, बजे खुशी के थाल।
क्यों बेटी के जन्म पर, करते लोग मलाल।। ३

पुत्र रत्न जिसको मिला , बहुत बजाते गाल।
नहीं समझ आता उन्हें, प्रबल चक्र का काल।। ४

वेद, पुराण, ग्रंथ सभी, नारी महिमा गाय।
फिर जाने क्यों कोख में, बेटी मारी जाय।। ५
-लक्ष्मी सिंह

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