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बेटियाँ

Poonam Singh

Poonam Singh

कविता

September 13, 2017

शीर्षक- बेटियाँ
देश की गौरव -गाथाओं में ,
चार चाँद लगाती हमारी बेटियाँ ।
आधी आबादी का प्रतिनिधित्व ,
करती हमारी बेटियाँ ।
प्रातः की वंदना बन दिन को ,
खुशहाल बनाती बेटियाँ ।
आशा की किरण बन ,
धैर्य बंधाती बेटियाँ ।
मस्तक की चन्दन बन घऱ का ,
मान बढ़ाती बेटियाँ ।
माँ-बाप की धड़कन उनका ,
विश्वास हमारी बेटियाँ ।
अंतरिक्ष में भी यान हैं ,
चलाती हमारी बेटियाँ ।
सेना की भी कमान हैं ,
सम्हालती हमारी बेटियाँ ।
उच्च से उच्चतम सीमा को ,
पार करती हमारी बेटियाँ ।
चढ़ाई कर ऊँची चोटी पर ,
रिकॉर्ड बनाती बेटियाँ ।
माता-पिता के दुख़ की पीड़ा,
को सहलाती हैं बेटियाँ ।
टीम क्रिकेट को प्यार से ,
सम्हालती हैं बेटियाँ ।
कुश्ती,अन्य खेलों में भी ,
परचम लहराती हैं बेटियाँ ।
प्राचीन युग की माँग पर सती,
होती थी हमारी बेटियाँ ।
कर्मवती,पद्मावती बन देश की,
आन बचाती थी बेटियाँ ।
बच्चों का भी मनोयोग से लालन,
पालन करती हैं बेटियां।
अनसुइया, सीता बन सती धर्म,
निभाती थी बेटियाँ ।
पति संग असुरों का मुक़ाबला,
करती थी बेटियाँ ।
शास्त्रार्थ कर याज्ञवलकय से इस्री का मान बढ़ाती बेटियाँ ।
१९वीं सदी में स्वतंत्रता संग्राम,
की भी भागी रही हैं बेटियाँ ।
देश के कोने-कोने से संग्राम की,
उदहारण रही हैं बेटियाँ ।
दोनों घरों के कर्तब्यों में ,
सन्तुलन बनाती बेटियाँ ।
बड़ी से बड़ी कठिनाई पर पार,
उतरती हैं बेटियाँ ।
स्वयं दुख़ को साँझा न कर,
अपने को फौलाद बनाती बेटियाँ । । ।

Author
Poonam Singh
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