बेटियाँ

बेटियाँ,बेटियाँ हैं
जो हैं सूत्रधार
सृजन की,ममत्व की-
और वैश्विक सौन्दर्य की ।
संभव नहीं
इनके बिना-
सृष्टि का अस्तित्व
और यहाँ तक-
‘परिवार’की पूर्णता।
कितना अधूरा लगता है,
बेटियों के बिना
एक पिता का व्यक्तित्व,
‘माँ’ का अधूरापन।
बेटियाँ
प्रकृति की अद्भुत सृजन हैं
जो बनाती हैं
एक परिवार, एक गांव और एक शहर भी
और फिर एक देश
और अंततः एक अद्भुत संसार।
वह माँ हैं, बहन हैं,प्रेयसी
और अर्धांगिनी भी,
वह नवदुर्गा हैं
और सहनशीलता के शीर्ष पर
प्रतिष्ठित
राम की सीता भी ।

Votes received: 38
395 Views
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख, कहानियां, व्यंग्य, कविताएं आदि प्रकाशित। 'कर्फ्यू में शहर' काव्य संग्रह, पंचफोरन... View full profile
You may also like: