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बेटियाँ

सागर यादव 'जख्मी'

सागर यादव 'जख्मी'

कविता

January 14, 2017

माता-पिता के अधरोँ की मुस्कान बेटियाँ

होती हैँ एक मुकम्मल संसार बेटियाँ

हिन्दू के लिए गीता ईसाई के लिए बाईबिल

मुस्लिम के लिए पवित्र कुरान बेटियाँ

दुनिया के लिए ये इक अनमोल धरोहर हैँ

मुँशी प्रेमचंद्र की गोदान बेटियाँ

किसमेँ इतना साहस जो छेड़े भला इनको

यदि अपने पे आ जाएँ तो तलवार बेटियाँ

उमा -रमा, सीता -सावित्री

और दुर्गा का अवतार बेटियाँ

बिना इनके सृष्टि की कल्पना ही नहीँ

‘सागर ‘ सृष्टि का हैँ आधार बेटियाँ

Author
सागर यादव 'जख्मी'
नाम- सागर यादव 'जख्मी' जन्म- 15 अगस्त जन्म स्थान- नरायनपुर पिता का नाम-राम आसरे माता का नाम - ब्रह्मदेवी कार्यक्षेत्र- अध्यापन माँ सरस्वती इंग्लिश एकाडमी ,सरौली,जौनपुर ,उत्तर प्रदेश. प्रकाशन -अमर उजाला ,दैनिक जागरण ,रचनाकार,हिन्दी साहित्य ,स्वर्गविभा,प्रकृतिमेल ,पब्लिक इमोशन बिजनौर ,साहित्यपीडिया... Read more
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