बेटियाँ

बेटियाँ

कोमल फूल की कली सी होती हैं बेटियाँ ।
माँ बाप के लाड़ में पली होती हैं बेटियाँ ।।
खुशी का पिटारा होतीं हैं बेटियाँ ।
घर का सितारा होतीं हैं बेटियाँ ।।
विनम्रता और लज्जालुता हैं उनके गुण ।
बेटियाँ होतीं हर कार्य में निपुण ।।
बेटियाँ बहादुर वीरांगनाएँ हैं ।
बेटियाँ विश्व की गौरव गाथाएँ हैं ।।
बेटियाँ सिर्फ दो कुलों का ही नहीं करतीं हित ।
बेटियाँ नहीं होने देतीं किसी का भी अहित ।।
बेटियों से नव कल्पनाएँ हैं ।
बेटियाँ मंगल कामनाएँ हैं ।।
बेटियों को खुले आसमान में उड़ान भरने दो ।
बेटियों को नित नए इतिहास गड़ने दो ।।
बेटियाँ मान – सम्मान हैं ।
बेटियाँ विश्व की शान हैं ।।
बेटियों ने जब दिखाया अपना कौशल ।
सम्पूर्ण विश्व रहा चकित एक पल ।।
बेटियाँ अबला नहीं, बलवान हैं ।
बेटियों से ये जहान हैं ।।
बेटियाँ कभी बहिन रूप में भाई को स्नेह देती ।
बेटियाँ कभी माँ रूप में बच्चों को स्नेह धारा में डुबोती ।।

– नवीन कुमार जैन

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "बेटियाँ"

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