.
Skip to content

बेटियाँ देश की

अजय '' बनारसी ''

अजय '' बनारसी ''

कविता

January 13, 2017

मिला कंधे से कंधा
कुंठित धारणाओ को तोड़
कंटक भरे राह को कर सुगम
बड़ी लड़ाई लड़ लड़कर
विश्व में परचम लहरा रही है
बेटियाँ देश की
माँ , बहन , पत्नी
मैत्रेयी , गार्गी और दुर्गा
सिन्धु, साक्षी,किरण बेदी
महादेवी और मनु भंडारी
हर रूप में आगे है
बेटियाँ देश की
जब जन्म बेटी का
घर में होता है
न जाने क्यों आज भी
उत्सव नहीं होता है
आदिकाल से आजतक
हमे राह दिखा रही है
बेटियाँ देश की

शक्ति को भूल हम
कैसे बेटे के लिए ललक रहे
भूल रहे सृजन हमारा भी
यदि बेटी न हो तो शून्य रहे
मनुष्य के भ्रूण से जीव होने का दर्शन
मूक भाषा में हमे समझा रही है
बेटियाँ देश की

कभी उलझन में हो पिता
बाहरी कामकाज से हो थका
चेहरे पर सिर्फ मुस्कान से
पल भर में हँसी लाती है
भूल उपेक्षाए बेटी के होने से
पिता के दुखो के लिए अक्सर
ममता का कंधा बन जाती है
बेटियाँ देश की

प्रण ले हम सब आज यहाँ
उत्सव बेटी के होने से भी होगा
बेटा चिता को अग्नि दे सकता है
तो यह हक़ बेटियों को भी होगा
नहीं कोई डर तर्पण का दिल में रखना होगा
मानते थे कल हम माँ दुर्गा देवी स्वरुप बेटी को
आज फिर से हमे सबकुछ समर्पण करना होगा
नहीं मुझे थोड़ी भी चिंता लोग क्या कहेंगे
कंधे पर बेटी के जाऊंगा,
शब्द मेरे हो जन जन तक परिभाषित
मै एक ऐसा अलख जगाऊंगा
क्योंकि
मेरा आदर और सम्मान, देश का गौरव है
बेटियाँ देश की

Author
अजय '' बनारसी ''
अजयप्रकाश सा. शुक्ला , निवास : मुंबई , महाराष्ट्र पैत्रिक निवास : भदोही , उ. प्र. शिक्षा : डिप्लोमा सिविल इंजीनियरिंग रूचि : समाज सेवा , कविता लेखन
Recommended Posts
बेटियाँ
शीर्षक- बेटियाँ देश की गौरव -गाथाओं में , चार चाँद लगाती हमारी बेटियाँ । आधी आबादी का प्रतिनिधित्व , करती हमारी बेटियाँ । प्रातः की... Read more
बेटियाँ
बेटियाँ हर कोख कौम देश का अभिमान बेटियाँ कर रही हैं राष्ट्र का निर्मान बेटियाँ प्रकृति प्रदत्त प्रेम की संतान बेटियाँ प्रभू ने खुद रचा... Read more
बेटियाँ
मां की ममता है बेटियाँ । पिता की दुर्बलता है बेटियाँ । पति का पूर्णता है बेटियाँ । परिवार की रौनकता है बेटियाँ । समाज... Read more
गीतिका
*गीतिका * देश हित के लिए खेलती बेटियाँ हर कदम पर यहाँ जीतती बेटियाँ देखिये देश में अब पदक ला रहीं बढ़ धरा से गगन... Read more