.
Skip to content

बेटियाँ तो बाबुल की रानियाँ हैं

उमा शर्मा

उमा शर्मा

कविता

January 22, 2017

मन का मृदंग हैं, भाव हैं, तरंग हैं, कल्पनाओं की पतंग हैं
निर्झर, निर्मल, नेह भरी, ये वात्स्ल्य पूर्ण रवानियाँ हैं
फिर भी बोलो आखिर क्यों ये, सबकी पहली परेशानियाँ हैं
कहने का न जिनको हक़ है, ये वो अधूरी कहानियाँ हैं

कहने को ही शायद बेटियाँ तो बाबुल की रानियाँ हैं

मीठा-मीठा दर्द इन्हीं से, मौसम घर का सर्द इन्हीं से
जब होता है मर्द इन्हीं से, फिर भी जाने अक्सर ही क्यों
ममतामयी मनोहारी बेटियाँ, कलमुँही, कुलद्रोही, कमतर
कमपोषित, बहुशोषित, कम आँकी गई जो, क्रमवार कुर्बानियाँ हैं

कहने को ही शायद …

पूर्व जन्म ही मार दिया कभी, पराई कह तिरस्कार किया कभी
बोझ समझ बहिष्कार किया कभी, जुए में भी हार दिया कभी
कुलच्छनी कह अस्वीकार किया कभी, बलात्कार उपहार दिया कभी
कभी कहा गया इनको ये नामुराद नादानियाँ हैं

कहने को ही शायद …

रसोई की महक है, घर-घर की चहक है,
पापा की मुस्कान है, भाई का अरमान है,
माँ का दुलार है, पति का प्यार है, रिश्तों का सार है,
न मैं जानूं, न तुम जानो, तो जाने ये कौन भला फिर
खोती है जो खुद को पल-पल, छलनी है क्यों उसका आँचल
क्यों वो झेले निष्ठुर नर की नालायक मनमानियां हैं

कहने को ही शायद …

दो-दो कुलों को रोशन करती, मन के अंगना में रंग भरती
क्यों न दें जो इनका हक़ है, क्यों लियाक़त पे इनकी शक़ है
क्यों न सचमुच मान लें अब तो, नहीं बेटों से कमतर कुछ भी
परमपिता का प्रतिबिम्ब ये, भूलोक की परियां प्यारी
घर को स्वर्ग कर देने वाली मनमोहक मृदुबानियां हैं

सिर्फ कहने को नहीं, बेटियाँ हाँ बेटियाँ सचमुच बाबुल की रानियाँ हैं।

Author
उमा शर्मा
आकाश से ऊँची, धरती सी महान हो... है एक ही तमन्ना कि पूरा मेरा अरमान हो... ए क़ाश कभी दुनिया में मेरी भी पहचान हो... छोटे से शहर कैथल में जन्मी-पली-बढ़ी और सिल्वर आॅक इंटरनैश्नल स्कूल में इंगलिश की अध्यापिका... Read more
Recommended Posts
बेटियाँ तो बाबुल की रानियाँ हैं
मन का मृदंग हैं, भाव हैं, तरंग हैं, कल्पनाओं की पतंग हैं निर्झर, निर्मल, नेह भरी, ये वात्स्ल्य पूर्ण रवानियाँ हैं फिर भी बोलो आखिर... Read more
****बेटियाँ***
04.01.17 **बेटियाँ** सांय 6.48 *************** बेटियाँ बाबुल के बगीचे की शान होती हैं बेटियाँ ...बाबुल की बुलबुल .. .और ******** माँ ..के दिल का अरमान... Read more
****   बेटियाँ  *****
बेटियाँ बाबुल के बगीचे की शान होती हैं बेटियाँ …बाबुल की बुलबुल .. .और माँ ..के दिल का अरमान होती है उसकी …चहचहाट घर-आंगन खेत-... Read more
बेटियाँ
घर की फुलवारी का सबसे सुंदर फूल होती बेटियाँ अपनेपन का आँगन होती बेटियाँ मिश्री सी मीठी डली होती बेटियाँ घर की ताजा सुबह होती... Read more