बेटियाँ : ऐसा क्यों

बढ़ रहे बलात्कारी !
चीख रही भारत की नारी !!
आज के मायावी राक्षसों से
भगवान भी घबराता है !
इसलिए द्रोपदी की लाज बचाने
कोई कृष्ण नहीं आता है !!
आखिर ऐसा क्यों होता है ?
सरकार आँख मूंद क्यों सोता है ?
बेगुनाह का कद जैसे आज
बौना नजर आता है !
इस आजाद देश में गुनहगार
हर रोज बच जाता है !!

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "बेटियाँ"

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